कन्यादान जाओ , मैं नहीं मानती कुछ , वैसे भी मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं , जिसको दान में दे दूँ ;
मैं बांधती हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में ,
तुम दोनों मिल के निभाना इसे ,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रही ,
आज से तुम्हारे दो घर ,
जब जी चाहे आना तुम ,
तुम्हारा यह कमरा हमेशा यूँ ही रहेगा जहाँ जा रही हो ,
खूब प्यार बरसाना तुम ,
सब को अपना बनाना तुम ,
पर कभी भी ,
न मर मर के जीना ,
न जी जी के मरना तुम ,
तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम ,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,
न तुम बेचारी , न अबला ,खुद को विक्टिम कभी न समझना तुम ,
मैं दान नहीं कर रही तुम्हें ,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रही हूँ ,
उसे बाखूबी निभाना तुम.
तुम दोनों मिल के निभाना इसे ,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रही ,
आज से तुम्हारे दो घर ,
जब जी चाहे आना तुम ,
तुम्हारा यह कमरा हमेशा यूँ ही रहेगा जहाँ जा रही हो ,
खूब प्यार बरसाना तुम ,
सब को अपना बनाना तुम ,
पर कभी भी ,
न मर मर के जीना ,
न जी जी के मरना तुम ,
तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम ,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,
न तुम बेचारी , न अबला ,खुद को विक्टिम कभी न समझना तुम ,
मैं दान नहीं कर रही तुम्हें ,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रही हूँ ,
उसे बाखूबी निभाना तुम.
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