Thursday, 30 June 2016

आसक्ति करनी हो तो भगवान के नामरूप में करो।

आसक्ति करनी हो तो भगवान के नामरूप में करो।
कामना  करनी  हो तो निर्मल  भजन  की  करो।।
क्रोध  करना  हो  तो  अपने  दुर्गुणों  पर  करो।
लोभ  करना  हो  तो भगवान के स्मरण का करो।।
मोह  करना  हो  तो  भगवान की लीला में करो।
मद  करना  हो  तो  भगवत्-प्रीति  का  करो।
अभिमान करना हो तो भगवान के दासत्व का करो।।
वैर  करना  हो  तो  अपने  दुराचारों  से करो।
हिंसा  करनी  हो  तो  अपने  अज्ञान की करो।।
समीप  रहना  हो  तो  भगवच्चरणों  के  रहो।
दूर  रहना   हो  तो   बुरे   संग  से  रहो।।

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