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Sunday, 24 May 2020
Thursday, 30 June 2016
Kanyadaan----aaj ki maa ki najron se................
कन्यादान जाओ , मैं नहीं मानती कुछ , वैसे भी मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं , जिसको दान में दे दूँ ;
तुम दोनों मिल के निभाना इसे ,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रही ,
आज से तुम्हारे दो घर ,
जब जी चाहे आना तुम ,
तुम्हारा यह कमरा हमेशा यूँ ही रहेगा जहाँ जा रही हो ,
खूब प्यार बरसाना तुम ,
सब को अपना बनाना तुम ,
पर कभी भी ,
न मर मर के जीना ,
न जी जी के मरना तुम ,
तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम ,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,
न तुम बेचारी , न अबला ,खुद को विक्टिम कभी न समझना तुम ,
मैं दान नहीं कर रही तुम्हें ,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रही हूँ ,
उसे बाखूबी निभाना तुम.
Thursday, 2 June 2016
"रिश्ता" और "विश्वास" ये
दोनों एक - दूसरे के मित्र
होते हैं ।
रखिए ।
होता है वहाँ "रिश्ते"
अपने आप ही बन जाते हैं ।
मै भले ही वो काम नहीं करता,
करता, जिससे भगवान
मिले.....
पर वो काम जरुर करता
हूँ जिससे दुआ मिले ।
इन्सानियत दिल में होती
है, हैसियत में नहीं.....
ऊपर वाला केवल 'कर्म'
देखता है वसीयत नहीं ।
शुभ: प्रभात्
Thursday, 12 May 2016
इंसान के पास जब पैसा नहीं होता है तो
💥 पैसा 💥
इंसान के पास जब पैसा नहीं होता है तो सब्जियां पका के खाता है
और
जब पैसा आ जाता है तो सब्जियां कच्ची खाता है।
जब पैसा नहीं होता है तो परमेश्वर का दर्शन करने जाता है
और
जब पैसा आ जाता है तो इंसान परमेश्वर को दर्शन देने जाता है।
जब पैसा नहीं होता है तो नींद से जगाना पड़ता है
और
जब पैसा आ जाता है तो नींद की गोली देके सुलाना पड़ता है।
जब पैसा नहीं होता है तो अपनी बीवी को सेक्रेट्री समझता है
लेकिन जब पैसा आ जाता है तो सेक्रेट्री को बीवी बना लेता है।।
ऐसा है ये पैसा अजीब है ये पैसा...?
छोटा सा जीवन है, लगभग 80 वर्ष।
उसमें से आधा =40 वर्ष तो रात को
बीत जाता है। उसका आधा=20 वर्ष
बचपन और बुढ़ापे मे बीत जाता है।
बचा 20 वर्ष। उसमें भी कभी योग,
कभी वियोग, कभी पढ़ाई,कभी परीक्षा,
नौकरी, व्यापार और अनेक चिन्ताएँ
व्यक्ति को घेरे रखती हैँ।अब बचा ही
कितना ? 8/10 वर्ष। उसमें भी हम
शान्ति से नहीं जी सकते ? यदि हम
थोड़ी सी सम्पत्ति के लिए झगड़ा करें,
और फिर भी सारी सम्पत्ति यहीं छोड़
जाएँ, तो इतना मूल्यवान मनुष्य जीवन
प्राप्त करने का क्या लाभ हुआ?
स्वयं विचार कीजिये :- इतना कुछ होते हुए भी,
1- शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
👍मौन होना सब से बेहतर है।
2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
👍सफेद रंग सब से बेहतर है।
3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
👍उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।
4-पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
👍पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।
5- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
👍बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।
6- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
👍अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।
7- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
👍सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है।
इंसान के अंदर जो समा जायें वो
" स्वाभिमान "
और
जो इंसान के बाहर छलक जायें वो
" अभिमान "
ये मैसेज पूरा पढ़े, और
अच्छा लगे तो सबको भेजें 🙏
✔जब भी बड़ो के साथ बैठो तो
परमेश्वर का धन्यवाद ,
क्योंकि कुछ लोग
इन लम्हों को तरसते हैं ।
✔जब भी अपने काम पर जाओ
तो परमेश्वर का धन्यवाद करो
क्योंकि
बहुत से लोग बेरोजगार हैं ।
✔ परमेश्वर का धन्यवाद कहो
जब तुम तन्दुरुस्त हो ,
क्योंकि बीमार किसी भी कीमत
पर सेहत खरीदने की ख्वाहिश
रखते हैं ।
✔ परमेश्वर का धन्यवाद कहो
की तुम जिन्दा हो ,
क्योंकि मरते हुए लोगों से पूछो
जिंदगी कीमत ।
दोस्तों की ख़ुशी के लिए तो कई मैसेज भेजते हैं ।
देखते हैं परमेश्वर के धन्यवाद का ये मैसेज कितने लोग शेयर करते हैं । 💐💐💐💐💐
👆👆must read👌
इन्सान गिरता है तो सिर्फ उसी का फैक्चर होता है
उसी का फैक्चर होता है ।
है तो पूरे समाज का फैक्चर
होता है ।
"परिवार" से बड़ा कोई "धन" नहीं!
"धन" नहीं!
"पिता" से बड़ा कोई
"सलाहकार" नहीं!
"माँ" की छाव से बड़ी
कोई "दुनिया" नहीं!
"भाई" से अच्छा कोई
"भागीदार" नहीं!
"बहन" से बड़ा कोई
"शुभचिंतक" नहीं!
"पत्नी" से बड़ा कोई
"दोस्त" नहीं
इसलिए
"परिवार" के बिना
"जीवन" नहीं!!!
'बड़ों' से बात करने का तरीका आपकी.
तरीका आपकी.....
"तमीज" को बताता है ।
का तरीका आपकी.....
"परवरिश" को बताता है ।
'आवाज' में नहीं.....
अपने 'शब्दों' में डालें ।
उगते हैं "तूफान" से नहीं ।
Sunday, 10 April 2016
एक गरीब ब्राह्मण को अपनी कन्या का विवाह करना था
एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा
हूँ"।
विवेकानंद ने पूछा- "क्यों देवी ? पर मैं तो ब्रह्मचारी हूँ"।
ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी
करके ही मिल सकता है मुझे"।
विवेकानंद कहते हैं - "इसका और एक उपाय है"
विदेशी महिला पूछती है -"क्या"?
पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल
जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नही तोड़ना
पड़ेगा"
महिला हतप्रभ होकर विवेकानंद को ताकने लगी
और रोने लग गयी,
अंदर आने की अनुमति न दें।"
बल्कि इसलिए बुरी है कि यहाँ अच्छे
लोग खामोश है..
एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा
बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया। प्रेम
भी इतना कि बादशाह भोजन भी अपने साथ बैठकर खीलाता।
करते।
गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक
ही फल लगा था।
अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े
किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा
फकीर को दिया।
'बहुत स्वादिष्ट है!' ऎसा फल पहले कभी नहीं खाया। एक
टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल
गया।
लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा
लिए।
कहा, 'यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा
हूं।
करते।
और राजा ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया।
कड़वा था।
राजा बोला,
'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?
उस फकीर का उत्तर था,
'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक
कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?
लेता गया ताकि आपको पता न चले।
Thursday, 17 March 2016
गरीब दूर तक चलता है..... खाना खाने के लिए.
✅ अमीर मीलों चलता है..... खाना पचाने के लिए......।
✅ किसी के पास खाने के लिए..... एक वक्त की रोटी नहीं है.....
✅ किसी के पास खाने के लिए..... वक्त नहीं है.....।
✅ कोई लाचार है.... इसलिए बीमार है....।
✅ कोई बीमार है.... इसलिए लाचार है....।
✅ कोई अपनों के लिए.... रोटी छोड़ देता है...।
✅ कोई रोटी के लिए..... अपनों को छोड़ देते है....।
✅ ये दुनिया भी कितनी निराळी है। कभी वक्त मिले तो सोचना....
✅ कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे.... आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
✅ पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे... आज दोस्तों की यादों में रहते है...।
✅ पहले लड़ना मनाना रोज का काम था.... आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
✅ सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया, जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।
जिंदगी बहुत कम है, प्यार से जियो
🔺"RINGTONE" कितना प्यारा बजता है!
भाग कर आएगा,
जो नहीं है , वह
आकर भी भाग जाएगा...!"
दोस्तों रहना जरा संभाल के ,
बेचने वाले हवा भी बेच देते है ,
गुब्बारों में डाल के ,
बिकती है हर कहानी ,
तीनों लोक में फेला है , फिर भी
बिकता है बोतल में पानी ,
जिस दिन खिलोगे ,
टूट कर बिखर्र जाओगे ,
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए ,
"भगवान" बन जाओगे....!!
"रिश्ता" दिल से होना चाहिए, शब्दों से नहीं,
"नाराजगी" शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं!
सड़क कितनी भी साफ हो
"धुल" तो हो ही जाती है,
इंसान कितना भी अच्छा हो
"भूल" तो हो ही जाती है!!!
आइना और परछाई के
जैसे मित्र रखो क्योकि
आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती......
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
"मैं अपनी 'ज़िंदगी' मे हर किसी को
'अहमियत' देता हूँ...क्योंकि
जो 'अच्छे' होंगे वो 'साथ' देंगे...
और जो 'बुरे' होंगे वो 'सबक' देंगे...!!
अगर लोग केवल जरुरत पर
ही आपको याद करते है तो
बुरा मत मानिये बल्कि
गर्व कीजिये क्योंकि "
मोमबत्ती की याद तभी आती है,
जब अंधकार होता है।"
महाराणा प्रताप को घास की रोटी
अपने बच्चों के लिए सेंकनी पड़ी ...और उसे
भी एक जंगली बिलाव झपट्टा मारकर ले
भागा, उसके बाद पूरा परिवार भूखा सो
गया.. . महाराणा की आँखों में आँसू आ
गए....पर उन्होंने अकबर की अधीनता
स्वीकार नहीं की..!! . अब आप सभी
बताइए.... . क्या जंगल में महाराणा
प्रताप को चार खरगोश नहीं मिल रहे थे
पकाने को ?? या उनका भाला एक भैंसा
नहीं मार सकता था..?? . यह कथा भी
सिद्ध करती है....महापुरुष,महायोद्धा
भी मांसाहारी नहीं थे .।।" . मेरी ये
पोस्ट खासकर उन लोगो के लिए है जो कल
शिवसेना द्वारा मांस बेचने को सही बता
रहे थे और खुद को राणा प्रताप और शिवजी की संतान
कहते हैं .
मांसाहारी डरते थे।।
नमन 'सिकंदर' करते थे॥
वन में जिसका धाम था।।
शाकाहारी राम था।।
मांस पशु के ढेरो में।।
' शबरी' के जूठे बेरो में॥
गोवर्धन पर भारी थे॥
'गिरधर' शाकाहारी थे॥
चोटी पर फहराया था।।
जिसने मान बढाया था॥
मानवता के विस्तार के।।
वाचक शाकाहार के॥
गौरवमय इतिहास को।।
इस नीले आकाश को॥
पशु के करुण क्रंदन को।।
शाकाहारी भोजन को॥
क्या फ़िर भी वो इंसान है?
या कोई कब्रिस्तान है?
उंगली अपनी जलती है।।
जिस्म पे आरी चलती है॥
बचने के आसार नही।।
उस पीडा का पार नही॥
चीख जीव की सुन लेते।।
गिरी गिरनार को चुन लेते॥
।।.शाकाहार-अभियान.।।
Tuesday, 1 March 2016
Tuesday, 3 November 2015
पक्के हुए फल की तीन
पहचान होती है.....
एक वह नर्म हो जाता है,
दूसरे वह मीठा हो जाता
है, एवं तीसरे उसका रंग
बदल जाता है ।
की भी तीन पहचान होती
है.....
एक तो उसमें नम्रता होती
है, दूसरे उस की वाणी में
मिठास होता है एवं तीसरे
उसके चेहरे पर आत्म -
विश्वास होता है ।

