Thursday, 12 May 2016

पत्नी : तुम आज फिर शराब पीकर आए हो,

पत्नी : तुम आज फिर शराब पीकर आए हो,
टाइम देखो कितना हुआ है?
पति : बारह में पाँच कम ।
पत्नी : और पियो शराब, अभी सात बज रहे हैं और तुम्हें बारह में पाँच कम नज़र आ रहा है।
पति : तो बारह में पाँच कम कितना होता है ??

एक शराब की दुकान मे लिखी कुछ सच्ची लाईन

"एक शराब की दुकान मे लिखी कुछ सच्ची लाईन "

तुम किसी लडकी से
         सच्चा प्यार करते हो तो,
तुमहे एक दिन मुझसे भी
             प्यार हो जायेगा...!!!

बीवी ने अपनी मॉ को फ़ोन किया

बीवी ने अपनी मॉ को फ़ोन किया :-  मम्मी मेरा उनसे झगड़ा हो गया है,
 मैं 3-4 महीने के लिए घर आ रही हू ।
अब दिल थाम लो
मॉ बोली : झगड़ा उस कम्बख़्त ने किया है तो सज़ा उसे ही मिलनी चाहीए,
तू रूक मैं ही 5-6 महिने के लिए वहाँ आ जाती हू ।

एक युवा बच्चे की लव स्टोरी- मैं तीन साल का था और वो पैदा हुई

एक युवा बच्चे की लव स्टोरी-
मैं तीन साल का था और वो पैदा हुई।
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मैंने स्कूल में एडमिशन लिया,
और वो दो साल की थी।
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मैं 2nd में और वो KG में।
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मैं 7th में और वो 4th में।
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मैं 10th में और वो 7th में।
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मैं 12th में और वो 9th में।
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मैं B.A में वो 10th में।
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मैं ssc की तैयारी में और वो 12th में।
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मैं ssc की तैयारी में और वो बी.ए. में।
,
मैं ssc की तैयारी में और वो एम.ए. में।
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मैं ssc की तैयारी में और वो एम.फिल. में।
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मैं ssc की तैयारी में और वो पी.एच.डी. में।
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मैं ssc की तैयारी में और वो प्रोफेसर बन गई।
,
शनिवार को उसकी शादी है,
और रविवार को मेरा ssc का पेपर । 

शख्सियत, ए ‘लख्ते-जिगर’, कहला न सका ।

शख्सियत, ए ‘लख्ते-जिगर’, कहला न सका ।
जन्नत.. के धनी पैर.. कभी सहला न सका ।
दुध, पिलाया उसने छाती से निचोड़कर,
मैं ‘निकम्मा’, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।
बुढापे का सहारा.. हूँ ‘अहसास’ दिला न सका
पेट पर सुलाने वाली को ‘मखमल, पर सुला न सका ।
वो ‘भूखी’, सो गई ‘बहू’, के ‘डर’, से एकबार मांगकर,
मैं सुकुन.. के ‘दो, निवाले उसे खिला न सका ।
नजरें उन बुढी, आंखों.. से कभी मिला न सका ।
वो दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।
जो हर रोज ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,
उसे दीवाली पर दो जोड़, कपडे सिला न सका ।
बिमार बिस्तर से उसे शिफा, दिला न सका ।
खर्च के डर से उसे बडे़ अस्पताल, ले जा न सका ।
माँ के बेटा कहकर दम, तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,
दवाई, इतनी भी महंगी.. न थी के मैं ला ना सका ।

ट्रेन को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था क्योंकि बिना टिकट

ट्रेन को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था क्योंकि बिना टिकट वालों की चेकिंग हो रही थी !!
इतने में एक सरदार जी ट्रेन से कुदे और लगे भागने
उनको भागते देख सभी पुलिस वाले , मजिस्ट्रेट सब उसको पकडने दौडे 
देखते ही देखते सरदार जी के साथ कई लोग भागने लगे ,
चुंकि सभी पुलिस वालों और मजिस्ट्रेट का ध्यान सरदार जी की तरफ था इसलिए दुसरों के उपर किसी का ध्यान नहीं गया !!
अंत में सरदार जी को पकडा गया लेकिन साथ दौडने वाले भाग निकले 
फिर पुलिस वालों ने सरदारजी से टिकट दिखाने को कहा
सरदार जी ने जेब से तुरंत टिकट निकाला और मजिस्ट्रेट के हाथों में रख दिया !
सभी हक्के बक्के ,
मजिस्ट्रेट ने चिल्लाकर पुछा जब तेरे पास टिकट थी तो तुम भागे क्यों ?
सरदार जी मौन रहे हल्के से मुस्कराते रहे !!
जब मजिस्ट्रेट ने ज्यादा जोर देकर पुछा तो सरदार जी ने मुंह खोला और कहा "हजारों सवालों से अच्छी है मेरी दौड, ना जाने कितने बेटिकटों की आबरू बच गई " !!!!
मतलब सरदार जी तो ईमानदार रह गए लेकिन कई घोटाले बाज़ों को अपने ईमानदारी के सर्टिफिकेट से बचा ले गए।।
नोट-इस कहानी का सरदार मनमोहन सिंह से कुछ लेना देना नहीं है |

जीवन में अगर सहनशीलता और क्रोध

जीवन में अगर सहनशीलता और क्रोध पर संयम सीखना हो तो
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एक साड़ी की दूकान खोल के देखें !!