Sunday, 10 April 2016

कुछ सवाल ऐसे भी होते है जिनका कोई एक सही जवाब नही हो सकता:

कुछ सवाल ऐसे भी होते है जिनका कोई एक सही जवाब नही हो सकता:

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : हाँ 😇
बीवी : *चटाक* 😡

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : नहीं 😰
बीवी : झूठे 😡

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : शायद 😐
पत्नी : तुम इतने decisive कैसे हो सकते हो 😡

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : मुझे नही पता 😑
बीवी : अंधे हो क्या 😡

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : Depend करता है 🤔
बीवी : Oh! तो तुम मुझे किसी और के साथ compare कर रहे हो 😡

बीवी : क्या मै मोटी दिखती हुँ?
पति : *silence* 😷
बीवी : बहरे हो क्या सुनाई नही देता क्या 😡
😂😂😂

एक गरीब ब्राह्मण को अपनी कन्या का विवाह करना था

एक गरीब ब्राह्मण को अपनी कन्या का विवाह करना था ! उसने विचार किया कि कथा करने से कुछ पैसा आ जायेगा तो काम चल जायेगा ! ऐसा विचार करके उसने भगवान राम के एक मंदिर में बैठ कर कथा आरम्भ कर दी ! उसका भाव यह था कि कोई श्रोता आये चाहे न आये पर भगवान तो मेरी कथा सुनेंगे !
पंडित जी की कथा में थोड़े से श्रोता आने लगे ! एक बहुत कंजूस सेठ था; एक दिन वह मंदिर में आया ! जब वह मंदिर की परिक्रमा कर रहा था तब भीतर से कुछ आवाज आई ! ऐसा लगा कि दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे हैं ;
सेठ ने कान लगा कर सुना कि भगवान राम हनुमान जी से कह रहे थे कि इस गरीब ब्राह्मण के लिए सौ रूपये का इंतजाम कर देना जिससे कन्यादान ठीक हो जाये ! हनुमान जी ने कहा -ठीक है भगवन ; इसके सौ रूपये पैदा हो जायेंगे !
सेठ ने यह सुना तो वह कथा समाप्ति के बाद पंडित जी से मिले और उनसे पूछा कि महाराज कथा में रूपये पैदा हो रहें कि नहीं ? पंडित जी बोले - श्रोता बहुत कम आतें हैं तो रूपये कैसे पैदा हों ?
सेठ ने कहा कि मेरी एक शर्त है कथा में जितना पैसा आये वह मेरे को दे देना और मैं आप को पचास रूपये दे दूंगा ! पंडित जी ने सोचा कि उसके पास कौन से इतने पैसे आतें हैं ? पचास रूपये तो मिलेंगे !
पंडित जी ने सेठ की बात मान ली ; उन दिनों पचास रूपये बहुत सा धन होता था ! इधर सेठ की नीयत थी कि भगवान की आज्ञा का पालन करने हेतु हनुमान जी सौ रूपये पंडित जी को जरूर देंगे ; मुझे सीधे-२ पचास रूपये का फायदा हो रहा है !
जो लोभी आदमी होते हैं वे पैसे के बारे में ही सोचते हैं ; सेठ ने भगवान की बातें सुनकर भी भक्ति की ओर ध्यान नहीं दिया बल्कि पैसे की ही ओर आकर्षित हो गये !
अब सेठ जी कथा के उपरांत पंडित जी के पास गये और उनसे कहने लगे कि कितना रुपया आया है ! सेठ के मन में विचार था कि हनुमान जी सौ रूपये तो भेंट में जरूर दिलवायेंगे मगर पंडित जी ने कहा कि पाँच-सात रूपये ही आयें हैं ! अब सेठ को शर्त के मुताबिक पचास रूपये पंडित जी को देने पड़े !
सेठ को हनुमान जी पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था कि उन्होंने पंडित जी को सौ रूपये नहीं दिये ! वह मंदिर में गया और हनुमान जी की मूर्ति पर घूँसा मारा ; घूँसा मारते ही सेठ का हाथ मूर्ति से चिपक गया !
अब सेठ जोर लगाये अपना हाथ छुड़ाने के लिये पर नाकाम रहा ; हाथ हनुमान जी की पकड़ में ही रहा ! हनुमान जी किसी को पकड़ लें तो वह भला कैसे छूट सकता है !
सेठ को फिर आवाज सुनाई दी ; उसने ध्यान से सुना कि भगवान राम हनुमान जी से पूछ रहे थे कि तुमने ब्रह्मण को सौ रूपये दिलाये कि नहीं ? हनुमान जी ने कहा -भगवन पचास रूपये तो दिला दिये हैं बाकी रुपयों के लिये सेठ को पकड़ रखा है ; वह पचास रूपये दे देगा तो छोड़ दूँगा !
सेठ ने सुना तो विचार किया कि मंदिर में लोग आकर मेरे को देखेंगे तो बड़ी बेईज्ज़ती होगी अतः वह चिल्ला कर बोला - हनुमान जी महाराज मुझे छोड़ दो मैं पचास रूपये दे दूँगा ! हनुमान जी ने सेठ को छोड़ दिया ; सेठ ने जाकर पंडित जी को पचास रूपये दे दिये !
जय जय श्री राधे

दूध वाले हडताल करते हें तो दूध सडक पर फेंकते हें

दूध वाले हडताल करते हें तो दूध सडक पर फेंकते हें
टमाटर वाले हडताल करते हें तो टमाटर सडक पर फेंक देते हें
प्याज वाले हडताल करते हें तो प्याज सडक पर फेंक देते हें
जाने ज्वेलर्स को कब अक्ल आएगी?

सेविंग ब्लेड को कूड़े व् कचरे में बिलकुल न डालें

सेविंग ब्लेड को कूड़े व् कचरे में बिलकुल न डालें
जानकारी के अभाव में 90% घरो में ऐसा हो रहा है और अनजाने में हम पाप के भागीदार बन रहे हैं
प्रिय दोस्तों , एक ताजा जानकारी के अनुसार सेविंग करने के बाद कूड़ादान में ब्लेड के फेंकने के कारण हर साल हजारो पशूओ को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है
ध्यान दीजियेगा की कचरे में मुह मारते हुए जब ब्लेड जानवर के गले में फंसता है तो उसकी पीड़ा का हम अंदाजा भी नही लगा सकते वो बहोत जोर से छटपटाता है और फिर प्राण त्याग देता है
मूक जानवर के पास ब्लेड को गले से निकालने का कोई जरिया नही है
मेरे घर के पास कुछ ही दिनों पहले एक गउसाला में गाय ने प्राण त्याग दिए और बाद में पोस्टमार्टम में उसके पेट में ब्लेड चले जाने की पुष्टी हुयी
दोस्तों, पुराने ब्लेड को कचरे में डालने को बजाए घर पर कोई डिब्बे में डालना सुरु कर देवें
अगर आप हर रोज भी सेविंग करते हैं तो भी आप पांच साल में एक किलो के डिब्बे को पुराने ब्लेड से नही भर पायेगें
और जब आपको लगे की ज्यादा ब्लेड इकट्ठे हो गए है तो उन्हें जमीन में 2-3 फीट नीचे दबा देवे 
2-3 महीने में ही उनमे जंग आ जाता है फिर वो किसी को हानि नही पहुचा सकते
नोट कीजिये ब्लेड से ज्यादा पैनी इस दुनिया में कोई चीज नही है...तलवार भी नही

एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा

एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा - मैं आपसे शादी करना चाहती
हूँ"।
विवेकानंद ने पूछा- "क्यों देवी ? पर मैं तो ब्रह्मचारी हूँ"।
महिला ने जवाब दिया -"क्योंकि मुझे आपके जैसा
ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी
करके ही मिल सकता है मुझे"।
विवेकानंद कहते हैं - "इसका और एक उपाय है"
विदेशी महिला पूछती है -"क्या"?
विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए कहा -"आप मुझे ही अपना
पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल
जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नही तोड़ना
पड़ेगा"
महिला हतप्रभ होकर विवेकानंद को ताकने लगी
और रोने लग गयी,
ये होती है महान आत्माओ की विचार धारा ।
"पूरे समुंद्र का पानी भी एक जहाज को नहीं डुबा सकता, जब तक पानी को जहाज अन्दर न आने दे।
इसी तरह दुनिया का कोई भी नकारात्मक विचार आपको नीचे नहीं गिरा सकता, जब तक आप उसे अपने
अंदर आने की अनुमति न दें।"
"अंदाज़ कुछ अलग हैं मेरे सोचने का,,
सब को मंजिल का शौक है और मुझे रास्तों का...
ये दुनिया इसलिए बुरी नही के यहाँ बुरे लोग ज्यादा है।
बल्कि इसलिए बुरी है कि यहाँ अच्छे
लोग खामोश है..

एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा

एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा
बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया। प्रेम
भी इतना कि बादशाह भोजन भी अपने साथ बैठकर खीलाता। 
कोई भी काम दोनों साथ-साथ ही
करते।
एक दिन दोनों शिकार के गए और रास्ता भटक
गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक
ही फल लगा था।
बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को
अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े
किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा
फकीर को दिया।
फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला,
'बहुत स्वादिष्ट है!' ऎसा फल  पहले कभी नहीं खाया। एक
टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल
गया।
फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग
लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा
लिए।
जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने
कहा, 'यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा
हूं।
मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं
करते।
और राजा ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया।
मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह
कड़वा था।
राजा बोला,
'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?
'
उस फकीर का उत्तर था,
'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक
कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?
सब टुकड़े इसलिए
लेता गया ताकि आपको पता न चले।
दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो