Tuesday, 3 November 2015

चरण-स्पर्श से प्राप्तियां

चरण-स्पर्श से प्राप्तियां
                                                                                                                                                               बड़ों के चरण छूने से हमें अनेक फायदे होते हैं 
  • चरण-स्पर्श करते समय मन में अहंकार का भाव नहीं रहता ।
  • हमारे मन में विनम्रता का भाव जाग्रत होता है ।
  • बड़ों के आशीर्वाद के माध्यम से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है ।
  • दोनों हाथों से पैर छूने से हमारा योग-प्राणायाम् भी होता है जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है ।
  • सामने वाला कितना भी कठोर हो आशीर्वाद के स्वर निकल ही आते हैं ।
  • लगातार चरण-स्पर्श से जहां हमारे अन्दर का अहंकार मिट जाता है वहीं सामने वाला कितना भी बड़ा विरोधी हो, विरोध करना बन्द कर देता है ।
  • चरण-स्पर्श से हमारी संस्कृति जीवित रहती है और हमारा समाज में सम्मान बढ़ता है सभी बड़ो को चरण स्पर्श  

भगवान राम वंशावली

1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |
नोट : -अपने बच्चों को बार बार पढ़वाये और उन्हे हिन्दू धर्म की महता के बारे में समझायें |

पक्के हुए फल की तीन

     पक्के हुए फल की तीन
            पहचान होती है.....
            एक वह नर्म हो जाता है,
            दूसरे वह मीठा हो जाता
            है, एवं तीसरे उसका रंग
            बदल जाता है ।
      इसी तरह परिपक्व व्यक्ति
            की भी तीन पहचान होती
            है.....
            एक तो उसमें नम्रता होती
            है,  दूसरे उस की वाणी में
            मिठास होता है एवं तीसरे
            उसके  चेहरे पर आत्म -
            विश्वास होता है ।

वृद्धाआश्रम में माँ बाप को देखकर


वृद्धाआश्रम में माँ बाप को देखकर
सब लोग बेटो को
ही कोसते है,
लेकिन दुनिया वाले ये कैसे भूल जाते हैं की वहा भेजने मे किसी की बेटी
का ही अहम रोल होता है..!
वरना लोग अपने माँ बाप को शादी के पहले ही वृद्धाश्रम क्यों नही भेजते।
संस्कार बेटियों को भी दें ताकि कोई बेटों को ना कोसे।
 कड़वा है पर सत्य है

खली जगह में "हाँ" या "नही" भरो

 खली जगह में "हाँ" या "नही" भरो।
• ...........मैं इंसान नही बन्दर   हूँ।
• ...........मैं ही पागल हूँ।
• ...........मेरे दिमाग का कोई इलाज नहीं हैं।
• ...........मुझे पागलखाने जाना हैं।
    हँसो मत फ़ॉरवर्ड करो मजा आया ना अब आप भी दुसरो के मजे लो..

बीवी चालीसा

बीवी चालीसा    
बीवी सेवा सच्ची सेवा !
जो करे वो खाये मेवा !!
जो बीवी के पाँव दबावै !
बस वैकुंठ परम पद पावै !!
जो बीवी की करे गुलामी !
ना आये कोई परेशानी !!
जो बीवी की धोवे साड़ी !
उसकी किस्मत जग से न्यारी !!

भूत पिशाच निकट नहिं आवै !
जो  बीवी के कीर्तन गावै !!
हाथ जोड़ कर कीजिये
पत्नी जी का ध्यान
घर में खुशहाली रहे
हो जाये कल्यान
घरवाली को नमन कर
माला लेकर हाथ 
मुख से पत्नी-वन्दना
बोलो मेरे साथ
जय पत्नी देवी कल्यानी !
माया तेरी ना पहचानी !!
तुमसे सारे देवता हारे !
डर से थर-थर कांपें सारे !!
नहिं चरित्र तुम्हरा कोई जाना !
नर क्या ईश्वर ना पहचाना !!
अपरम्पार तुम्हारी माया !
कोई इसका पार न पाया !!
लगो देखने में तुम गुड़िया !
हो लेकिन आफत की पुड़िया !!
हे मेरे बच्चों की माता !
तुम हो मेरी भाग्यविधाता !
है बेलन हथियार तुम्हारा !
जब चाहा सिर पर दे मारा !!
ऐसी तेरी निकले बोली !
जैसे हो बंदूक की गोली !!

हम तुमसे डरते हैं ऐसे !
चोर पुलिस से डरता जैसे !!

ऐसा है आतंक तुम्हारा !
बिच्छू जैसा डंक तुम्हारा !!
करे पति जो पत्नी-सेवा !
मिलती उसको सच्ची मेवा !!
पत्नी-वन्दना जो कोई गावे !
जीवन में कोई कष्ट न पावे !!
प्रभु दीक्षित कर पत्नी-वन्दन
पत्नी का कर लो अभिनन्दन !!
वन्दहु पत्नी मुख-कमल
गुण-अवगुण की खान !
मिले नहीं बिन आपके,
पतियों को सम्मान !!
!बोलो पत्नी रानी की जय!

Sunday, 1 November 2015

एक आदमी ने होटल के कमरे से मैनेजर को फोन किया


एक आदमी ने होटल के कमरे से मैनेजर को फोन किया.
आदमी- प्लीज, जल्दी मेरे कमरे में आईये.. बहुत जरूरी है !
मैनेजर- क्या हुआ सर ?
आदमी- मेरी पत्नी कह रही है कि वो तुम्हारे होटल की खिडकी से कूद कर जान दे देगी.
मैनेजर- माफ कीजिये सर, पर इसमें हम कुछ नहीं कर सकते !
ये आपकी पर्सनल प्रॉब्लम है !
आदमी- हरामखोर! ये खिडकी नहीं खुल रही है.. ये मेंटेनेंस प्रॉब्लम है !!!