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Sunday, 20 March 2016
Thursday, 17 March 2016
गरीब दूर तक चलता है..... खाना खाने के लिए.
प्रत्येक लाइन गहराई से पढ़े-
✅ गरीब दूर तक चलता है..... खाना खाने के लिए......।
✅ अमीर मीलों चलता है..... खाना पचाने के लिए......।
✅ किसी के पास खाने के लिए..... एक वक्त की रोटी नहीं है.....
✅ किसी के पास खाने के लिए..... वक्त नहीं है.....।
✅ कोई लाचार है.... इसलिए बीमार है....।
✅ कोई बीमार है.... इसलिए लाचार है....।
✅ कोई अपनों के लिए.... रोटी छोड़ देता है...।
✅ कोई रोटी के लिए..... अपनों को छोड़ देते है....।
✅ ये दुनिया भी कितनी निराळी है। कभी वक्त मिले तो सोचना....
✅ कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे.... आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
✅ पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे... आज दोस्तों की यादों में रहते है...।
✅ पहले लड़ना मनाना रोज का काम था.... आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
✅ सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया, जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।
जिंदगी बहुत कम है, प्यार से जियो
रोज सिर्फ इतना करो -
✅ अमीर मीलों चलता है..... खाना पचाने के लिए......।
✅ किसी के पास खाने के लिए..... एक वक्त की रोटी नहीं है.....
✅ किसी के पास खाने के लिए..... वक्त नहीं है.....।
✅ कोई लाचार है.... इसलिए बीमार है....।
✅ कोई बीमार है.... इसलिए लाचार है....।
✅ कोई अपनों के लिए.... रोटी छोड़ देता है...।
✅ कोई रोटी के लिए..... अपनों को छोड़ देते है....।
✅ ये दुनिया भी कितनी निराळी है। कभी वक्त मिले तो सोचना....
✅ कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे.... आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
✅ पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे... आज दोस्तों की यादों में रहते है...।
✅ पहले लड़ना मनाना रोज का काम था.... आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
✅ सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया, जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।
जिंदगी बहुत कम है, प्यार से जियो
🔺गम को "Delete"
🔺खुशी को "Save"
🔺रिश्तोँ को "Recharge"
🔺दोस्ती को "Download"
🔺दुश्मनी को "Erase"
🔺सच को "Broadcast"
🔺झूठ को "Switch Off"
🔺टेँशन को "Not Reachable"
🔺प्यार को "Incoming"
🔺नफरत को "Outgoing"
🔺हँसी को "Inbox"
🔺आंसुओँ को "Outbox"
🔺गुस्से को "Hold"
🔺मुस्कान को "Send"
🔺हेल्प को "OK"
🔺दिल को करो "Vibrate"
फिर देखो जिँदगी का
🔺"RINGTONE" कितना प्यारा बजता है!
🔺"RINGTONE" कितना प्यारा बजता है!
"जो भाग्य में है , वह
भाग कर आएगा,
जो नहीं है , वह
आकर भी भाग जाएगा...!"
भाग कर आएगा,
जो नहीं है , वह
आकर भी भाग जाएगा...!"
यहाँ सब कुछ बिकता है ,
दोस्तों रहना जरा संभाल के ,
बेचने वाले हवा भी बेच देते है ,
गुब्बारों में डाल के ,
दोस्तों रहना जरा संभाल के ,
बेचने वाले हवा भी बेच देते है ,
गुब्बारों में डाल के ,
सच बिकता है , झूट बिकता है,
बिकती है हर कहानी ,
तीनों लोक में फेला है , फिर भी
बिकता है बोतल में पानी ,
बिकती है हर कहानी ,
तीनों लोक में फेला है , फिर भी
बिकता है बोतल में पानी ,
कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे ,
टूट कर बिखर्र जाओगे ,
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए ,
"भगवान" बन जाओगे....!!
"रिश्ता" दिल से होना चाहिए, शब्दों से नहीं,
"नाराजगी" शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं!
सड़क कितनी भी साफ हो
"धुल" तो हो ही जाती है,
इंसान कितना भी अच्छा हो
"भूल" तो हो ही जाती है!!!
आइना और परछाई के
जैसे मित्र रखो क्योकि
आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती......
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
"मैं अपनी 'ज़िंदगी' मे हर किसी को
'अहमियत' देता हूँ...क्योंकि
जो 'अच्छे' होंगे वो 'साथ' देंगे...
और जो 'बुरे' होंगे वो 'सबक' देंगे...!!
अगर लोग केवल जरुरत पर
ही आपको याद करते है तो
बुरा मत मानिये बल्कि
गर्व कीजिये क्योंकि "
मोमबत्ती की याद तभी आती है,
जब अंधकार होता है।"
जिस दिन खिलोगे ,
टूट कर बिखर्र जाओगे ,
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए ,
"भगवान" बन जाओगे....!!
"रिश्ता" दिल से होना चाहिए, शब्दों से नहीं,
"नाराजगी" शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं!
सड़क कितनी भी साफ हो
"धुल" तो हो ही जाती है,
इंसान कितना भी अच्छा हो
"भूल" तो हो ही जाती है!!!
आइना और परछाई के
जैसे मित्र रखो क्योकि
आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती......
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
"मैं अपनी 'ज़िंदगी' मे हर किसी को
'अहमियत' देता हूँ...क्योंकि
जो 'अच्छे' होंगे वो 'साथ' देंगे...
और जो 'बुरे' होंगे वो 'सबक' देंगे...!!
अगर लोग केवल जरुरत पर
ही आपको याद करते है तो
बुरा मत मानिये बल्कि
गर्व कीजिये क्योंकि "
मोमबत्ती की याद तभी आती है,
जब अंधकार होता है।"
महाराणा प्रताप को घास की रोटी
महाराणा प्रताप को घास की रोटी
अपने बच्चों के लिए सेंकनी पड़ी ...और उसे
भी एक जंगली बिलाव झपट्टा मारकर ले
भागा, उसके बाद पूरा परिवार भूखा सो
गया.. . महाराणा की आँखों में आँसू आ
गए....पर उन्होंने अकबर की अधीनता
स्वीकार नहीं की..!! . अब आप सभी
बताइए.... . क्या जंगल में महाराणा
प्रताप को चार खरगोश नहीं मिल रहे थे
पकाने को ?? या उनका भाला एक भैंसा
नहीं मार सकता था..?? . यह कथा भी
सिद्ध करती है....महापुरुष,महायोद्धा
भी मांसाहारी नहीं थे .।।" . मेरी ये
पोस्ट खासकर उन लोगो के लिए है जो कल
शिवसेना द्वारा मांस बेचने को सही बता
रहे थे और खुद को राणा प्रताप और शिवजी की संतान
कहते हैं .
अपने बच्चों के लिए सेंकनी पड़ी ...और उसे
भी एक जंगली बिलाव झपट्टा मारकर ले
भागा, उसके बाद पूरा परिवार भूखा सो
गया.. . महाराणा की आँखों में आँसू आ
गए....पर उन्होंने अकबर की अधीनता
स्वीकार नहीं की..!! . अब आप सभी
बताइए.... . क्या जंगल में महाराणा
प्रताप को चार खरगोश नहीं मिल रहे थे
पकाने को ?? या उनका भाला एक भैंसा
नहीं मार सकता था..?? . यह कथा भी
सिद्ध करती है....महापुरुष,महायोद्धा
भी मांसाहारी नहीं थे .।।" . मेरी ये
पोस्ट खासकर उन लोगो के लिए है जो कल
शिवसेना द्वारा मांस बेचने को सही बता
रहे थे और खुद को राणा प्रताप और शिवजी की संतान
कहते हैं .
कंद-मूल खाने वालों से
मांसाहारी डरते थे।।
मांसाहारी डरते थे।।
पोरस जैसे शूर-वीर को
नमन 'सिकंदर' करते थे॥
नमन 'सिकंदर' करते थे॥
चौदह वर्षों तक खूंखारी
वन में जिसका धाम था।।
वन में जिसका धाम था।।
मन-मन्दिर में बसने वाला
शाकाहारी राम था।।
शाकाहारी राम था।।
चाहते तो खा सकते थे वो
मांस पशु के ढेरो में।।
मांस पशु के ढेरो में।।
लेकिन उनको प्यार मिला
' शबरी' के जूठे बेरो में॥
' शबरी' के जूठे बेरो में॥
चक्र सुदर्शन धारी थे
गोवर्धन पर भारी थे॥
गोवर्धन पर भारी थे॥
मुरली से वश करने वाले
'गिरधर' शाकाहारी थे॥
'गिरधर' शाकाहारी थे॥
पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम
चोटी पर फहराया था।।
चोटी पर फहराया था।।
निर्धन की कुटिया में जाकर
जिसने मान बढाया था॥
जिसने मान बढाया था॥
सपने जिसने देखे थे
मानवता के विस्तार के।।
मानवता के विस्तार के।।
नानक जैसे महा-संत थे
वाचक शाकाहार के॥
वाचक शाकाहार के॥
उठो जरा तुम पढ़ कर देखो
गौरवमय इतिहास को।।
गौरवमय इतिहास को।।
आदम से गाँधी तक फैले
इस नीले आकाश को॥
इस नीले आकाश को॥
दया की आँखे खोल देख लो
पशु के करुण क्रंदन को।।
पशु के करुण क्रंदन को।।
इंसानों का जिस्म बना है
शाकाहारी भोजन को॥
शाकाहारी भोजन को॥
अंग लाश के खा जाए
क्या फ़िर भी वो इंसान है?
क्या फ़िर भी वो इंसान है?
पेट तुम्हारा मुर्दाघर है
या कोई कब्रिस्तान है?
या कोई कब्रिस्तान है?
आँखे कितना रोती हैं जब
उंगली अपनी जलती है।।
उंगली अपनी जलती है।।
सोचो उस तड़पन की हद जब
जिस्म पे आरी चलती है॥
जिस्म पे आरी चलती है॥
बेबसता तुम पशु की देखो
बचने के आसार नही।।
बचने के आसार नही।।
जीते जी तन काटा जाए,
उस पीडा का पार नही॥
उस पीडा का पार नही॥
खाने से पहले बिरयानी,
चीख जीव की सुन लेते।।
चीख जीव की सुन लेते।।
करुणा के वश होकर तुम भी
गिरी गिरनार को चुन लेते॥
गिरी गिरनार को चुन लेते॥
शाकाहारी बनो...!
।।.शाकाहार-अभियान.।।
।।.शाकाहार-अभियान.।।
नितीश लालू और मोदी बिना टिकट ट्रेन में
नितीश लालू और मोदी बिना टिकट ट्रेन में पकङे गये।
कोट ने उन्हे सौ-सौ डंडे मारने की सजा सुनाई।मारने से पहले उन से आखिरी ईच्छा पुछा गया।।
नीतीश- मुझे दो तकीया आगे और दो तकीया पीछे बाध के मारा जाये।।
करीब 40 डंडा पीटने के बाद तकीया फट गया और बाकी के डंडे उन्हे खाना पङा।।
अब लालू की बारी आया।। लालू- मुझे चार तकीया आगे और चार तकीया पीछे बाध के मारा जाये।।
करीब 60-70 डंडा पीटने के बाद तकीया फट गया और बाकी के डंडे उन्हे भी खाना पङा।।
अब मोदी की बारी आया।।
मोदी बोले नीतीश-को मेरे आगे लालू को मेरे पिछे बाध दो और फिर सौ क्या हजार डंडा मार लो।।
अकेले मत हॅसो सबको हॅसाओ forward करो market मे एकदम नया है।।।
कोट ने उन्हे सौ-सौ डंडे मारने की सजा सुनाई।मारने से पहले उन से आखिरी ईच्छा पुछा गया।।
नीतीश- मुझे दो तकीया आगे और दो तकीया पीछे बाध के मारा जाये।।
करीब 40 डंडा पीटने के बाद तकीया फट गया और बाकी के डंडे उन्हे खाना पङा।।
अब लालू की बारी आया।। लालू- मुझे चार तकीया आगे और चार तकीया पीछे बाध के मारा जाये।।
करीब 60-70 डंडा पीटने के बाद तकीया फट गया और बाकी के डंडे उन्हे भी खाना पङा।।
अब मोदी की बारी आया।।
मोदी बोले नीतीश-को मेरे आगे लालू को मेरे पिछे बाध दो और फिर सौ क्या हजार डंडा मार लो।।
अकेले मत हॅसो सबको हॅसाओ forward करो market मे एकदम नया है।।।
30% income tax 14% service tax
30% income tax, 14% service tax,
0.5% Swach Bharat tax, 0.5% Agri tax,
Vat 7.5%, cess pe cess uske upar ek aur cess
and now tax on PPF and EPF. Naukri karna desh bhakti se kaam nahi..
0.5% Swach Bharat tax, 0.5% Agri tax,
Vat 7.5%, cess pe cess uske upar ek aur cess
and now tax on PPF and EPF. Naukri karna desh bhakti se kaam nahi..
Tuesday, 1 March 2016
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