Thursday, 5 November 2015

May the festival of lights be the harbinger


May the festival of lights be the harbinger of joy and prosperity. 
As the holy occasion of Diwali is here
& the atmosphere is filled with the spirit of mirth & love,
here's hoping this festival of beauty brings ur way, 
bright sparkles of contentment, that stay with u through the days ahead.
Best wishes on Diwali and New year.

सभी से निवेदन है कि दीपावली के अवसर पर

सभी से निवेदन है कि दीपावली के अवसर पर किसी भी प्रकार की मिठाई के चित्र ना भेजें। मोबाइल में चींटियाँ घुस जाती हैं।
मिठाई का डब्बा सीधे घर ही पहुंचा दें।
कष्ट के लिये क्षमा।

Wednesday, 4 November 2015

मुसकरते हँसते दीप तुम जलना


मुसकरते हँसते दीप तुम जलना,
जीवन मैं नई खुशियों को लाना,
दुःख दर्द अपने भूल कर ,
सबको गले लगाना, सबको गले लगाना
शुभ दिवाली 

Amitabh - Mere Paas Rocket Hai,

Amitabh - mere paas rocket hai,
Chakari hai,
Murga Bumb hai,
Anaar hai,
double dhamaka hai
Tumhare paas kya hai?
Shashi Kapoor -
Mere paas
MAA...Chis  hai ......hihaaa

Happy Diwali

Tuesday, 3 November 2015

अल्पमपि क्षितौ

अल्पमपि क्षितौ क्षिप्तं वटबीजं प्रवर्धते ।
जलयोगात् यथा दानात् पुण्यवृक्षोऽपि वर्धते ॥
    
जमीन पर डाला हुआ छोटा सा वटवृक्ष का बीज, 
जैसे जल के योग से बढता है, वैसे पुण्यवृक्ष भी दान से बढता है ।

चरण-स्पर्श से प्राप्तियां

चरण-स्पर्श से प्राप्तियां
                                                                                                                                                               बड़ों के चरण छूने से हमें अनेक फायदे होते हैं 
  • चरण-स्पर्श करते समय मन में अहंकार का भाव नहीं रहता ।
  • हमारे मन में विनम्रता का भाव जाग्रत होता है ।
  • बड़ों के आशीर्वाद के माध्यम से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है ।
  • दोनों हाथों से पैर छूने से हमारा योग-प्राणायाम् भी होता है जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है ।
  • सामने वाला कितना भी कठोर हो आशीर्वाद के स्वर निकल ही आते हैं ।
  • लगातार चरण-स्पर्श से जहां हमारे अन्दर का अहंकार मिट जाता है वहीं सामने वाला कितना भी बड़ा विरोधी हो, विरोध करना बन्द कर देता है ।
  • चरण-स्पर्श से हमारी संस्कृति जीवित रहती है और हमारा समाज में सम्मान बढ़ता है सभी बड़ो को चरण स्पर्श  

भगवान राम वंशावली

1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |
नोट : -अपने बच्चों को बार बार पढ़वाये और उन्हे हिन्दू धर्म की महता के बारे में समझायें |